ATM New Charges Rule 2026 : अगर आप एटीएम से अक्सर पैसे निकालते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। खासकर उन लोगों के लिए जिनका खाता भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI में है। हाल ही में बैंकिंग नियमों में एक बदलाव किया गया है, जिसके बाद एटीएम से पैसे निकालना पहले की तुलना में थोड़ा महंगा हो गया है। यह बदलाव अचानक भले छोटा लगे, लेकिन रोजमर्रा की बैंकिंग करने वालों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
आज के समय में जब ज्यादातर लोग डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ रहे हैं, फिर भी एटीएम से नकद निकालना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गांवों, छोटे शहरों और कई रोजमर्रा के कामों में अभी भी कैश की जरूरत पड़ती है। ऐसे में एटीएम चार्ज में बढ़ोतरी आम आदमी के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
किस बैंक के ग्राहकों पर पड़ेगा असर
यह नया नियम मुख्य रूप से भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों पर लागू किया गया है। अगर आपका खाता SBI में है और आप दूसरे बैंकों के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको यह बदलाव सीधे महसूस होगा। खास बात यह है कि यह नियम तब लागू होता है, जब आपकी महीने की फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन लिमिट खत्म हो जाती है।
यानि जब तक आप फ्री लिमिट के अंदर हैं, तब तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन जैसे ही यह सीमा पूरी होती है, उसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर ज्यादा चार्ज देना पड़ेगा।
कैश निकालने पर कितना बढ़ा चार्ज
नए नियमों के अनुसार, अब अगर आप फ्री लिमिट खत्म होने के बाद किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो आपको प्रति ट्रांजैक्शन ₹23 का शुल्क देना होगा। इसके ऊपर से जीएसटी अलग से लगेगा।
पहले यही चार्ज ₹21 हुआ करता था, यानी अब सीधे तौर पर हर विड्रॉल पर ₹2 की बढ़ोतरी कर दी गई है। सुनने में यह रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन जो लोग महीने में कई बार एटीएम से पैसे निकालते हैं, उनके लिए यह खर्च धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन भी नहीं बचे
सिर्फ पैसे निकालना ही नहीं, बल्कि एटीएम से बैलेंस चेक करना या मिनी स्टेटमेंट निकालना भी अब महंगा हो गया है। इन्हें नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कहा जाता है।
अब ऐसे हर ट्रांजैक्शन पर ₹11 का शुल्क लगेगा, जिस पर जीएसटी अलग से देना होगा। पहले इसके लिए ₹10 चार्ज किया जाता था। यानी यहां भी ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है।
कई लोग अक्सर बैलेंस चेक करने या मिनी स्टेटमेंट के लिए एटीएम का इस्तेमाल करते हैं, खासकर वे लोग जो मोबाइल बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग का ज्यादा उपयोग नहीं करते। उनके लिए यह बदलाव थोड़ा चुभने वाला हो सकता है।
फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं
इस बदलाव के बीच एक राहत की बात यह है कि फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की संख्या में कोई कटौती नहीं की गई है। अभी भी ग्राहकों को हर महीने 5 फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा मिलती रहेगी।
इन फ्री ट्रांजैक्शन में कैश विड्रॉल और कुछ नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन दोनों शामिल होते हैं। इसका मतलब यह है कि जो लोग सीमित संख्या में एटीएम का इस्तेमाल करते हैं, उन पर इस बदलाव का असर कम पड़ेगा।
किन खाताधारकों पर लागू होंगे नियम
यह नियम SBI के सेविंग्स अकाउंट और सैलरी अकाउंट होल्डर्स पर लागू किए गए हैं। अगर आप नॉन-एसबीआई एटीएम का उपयोग करते हैं और आपकी फ्री लिमिट खत्म हो जाती है, तभी यह चार्ज लगेगा।
अगर आप SBI के ही एटीएम का उपयोग करते हैं, तो वहां नियम थोड़े अलग हो सकते हैं और चार्ज भी कम या शून्य हो सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप यह जानें कि आप किस बैंक के एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्यों बढ़ाए गए एटीएम चार्ज
बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, एटीएम के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा में बैंकों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा, कैश मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर भी काफी लागत आती है।
इन्हीं कारणों से समय-समय पर बैंक एटीएम चार्ज में बदलाव करते हैं। हालांकि, आम ग्राहक को यह बदलाव सीधे अपनी जेब पर महसूस होता है, इसलिए इसे लेकर नाराजगी भी देखी जाती है।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो महीने में कई बार एटीएम से पैसे निकालते हैं, खासकर दूसरे बैंकों के एटीएम से। छोटे दुकानदार, दिहाड़ी मजदूर, बुजुर्ग और वे लोग जो डिजिटल पेमेंट से कम जुड़ाव रखते हैं, उन्हें अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ सकता है।
हालांकि, जो लोग मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड से भुगतान करते हैं, उनके लिए यह बदलाव ज्यादा बड़ा नहीं होगा। यह नियम कहीं न कहीं लोगों को डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ने के लिए भी प्रेरित करता है।
पैसे बचाने के आसान तरीके
अगर आप इस बढ़े हुए चार्ज से बचना चाहते हैं, तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसे कि महीने की शुरुआत में ही अपनी जरूरत के अनुसार एक साथ पैसे निकाल लें, ताकि बार-बार एटीएम जाने की जरूरत न पड़े।
इसके अलावा, जहां संभव हो डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करें। बैलेंस चेक करने या स्टेटमेंट देखने के लिए मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग का सहारा लें, जिससे नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का चार्ज न देना पड़े।
जागरूक रहना क्यों जरूरी है
बैंकिंग से जुड़े ऐसे बदलाव अक्सर चुपचाप लागू कर दिए जाते हैं और ग्राहक बाद में चार्ज देखकर हैरान रह जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप समय-समय पर अपने बैंक से जुड़े नियमों की जानकारी लेते रहें।
अपने दोस्तों, परिवार और खासकर बुजुर्गों को भी ऐसे बदलावों के बारे में बताएं, ताकि वे अनजाने में अतिरिक्त चार्ज न दे बैठें। थोड़ी सी जानकारी और सतर्कता से आप हर महीने कुछ पैसे बचा सकते हैं।
एटीएम से पैसे निकालना अब पहले के मुकाबले थोड़ा महंगा जरूर हो गया है, लेकिन सही प्लानिंग और समझदारी से इस खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फ्री ट्रांजैक्शन का सही उपयोग, डिजिटल बैंकिंग की आदत और जरूरत के हिसाब से कैश निकालना आपको अतिरिक्त चार्ज से बचा सकता है। बैंकिंग नियम बदलते रहते हैं, ऐसे में जागरूक ग्राहक ही सबसे ज्यादा फायदा उठा पाता है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। एटीएम चार्ज, फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट और बैंकिंग नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने संबंधित बैंक की आधिकारिक जानकारी या शाखा से पुष्टि अवश्य करें। लेख में दी गई जानकारी के आधार पर किसी भी प्रकार के नुकसान या भ्रम के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।